साहित्य

जन्मदिन का प्यारा एहसास

कवयित्री ज्योती वर्णवाल

जन्मदिन का प्यारा एहसास

हम महिलाओं को जन्मदिन का बेसब्री से इंतज़ार रहता है,
मन ही मन सपनों का एक प्यारा-सा आँगन सजता है।
चुपके से सोचते हैं, कौन हमें सबसे पहले याद करेगा,
कौन लाएगा चेहरे पर मुस्कान, कौन दिल की बात कहेगा।
एक छोटा-सा केक और हाथ में खिला एक नन्हा गुलाब,
दे जाता है खुशियों की एक बहुत बड़ी और अनमोल किताब।
उपहारों से कहीं बढ़कर, अपनों के प्यार की एक झलक है प्यारी,
बस कोई याद रख ले… तो उस एहसास पर जाए दुनिया सारी।
मन ही मन खुशियों के अनगिनत धागे बुनती रहती हैं,
हम स्त्रियाँ तो बस थोड़े से मान और प्यार से जीती रहती हैं।
जन्मदिन केवल एक तारीख़ नहीं, एक अनूठा एहसास है,
हर स्त्री के मन में बसा, अपनों के प्रति मीठा विश्वास है।
— कवयित्री ज्योती वर्णवाल

नवादा (बिहार)

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