
मोबाइल की आदत छोड़ो
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मोबाइल ने ले ली जान ।
घर बन गया शमशान ।।
रिश्तों में बढ़ गई दूरी।
जैसे खींच गए तीर-कमान ।।
छोड़ो इसका बुरा चलन है।
ये जीवन के लिए गलन है ।।
खेलों खेल मैदान में जाकर ।
छूलो दुनिया को मुस्काकर ।।
घर की दुनिया उजड़ रही है।
सारी दुनिया बिगड़ रही है ।।
फुलबारी यूं उजड़ रही है।
ममता कैसी बिलख रही है।।
बचालो घर की बरबादी को।
दूर रखो इस मोबाइल को।।
ये जीवन डसने वाला है।
इस का हर पन्ना काला है।।
आत्महत्या लगीं सर चढ़ने ।
संख्या इसकी लगी है बढ़ने ।।
एक साथ फिर मिलकर बैठो।
बिना बात मत घर में ऐंठो ।।
जितना जरूरी उतना चलाओ।
परिवार ना इसको बनाओं ।।
ये चर्चा अब बहुत जरूरी ।
ख़त्म करो आपस की दूरी ।।
मोबाइल परिवार नहीं है ।
अच्छा इसका व्यवहार नहीं है ।।
ये कातिल हमने ही बनाया ।
आंख खुली और इसे उठाया।।
किताबों से प्यार करो तुम ।
मत जीवन बेकार करो तुम ।।
गेम कभी मत इससे खेलों ।
बेमतलब का तनाव ना झेलो।।
कसम खाओ आदत बदलोगे ।
मोबाइल की आदत छोड़ोगे ।।
ये हर बीमारी पर भारी ।
इसकी आदत है खारी ।।
मोबाइल की आदत छोड़ो।
परिवार से रिश्ता जोड़ों।।
पापा – मम्मी की मानों बातें।
ख़त्म सभी जीवन के घाटे।।
ये संस्कृति मिटा रहा है।
कपड़ों को ये घटा रहा है ।।
‘सागर’ सबको ये समझाना ।
मोबाइल को कम ही चलाना।।
बेख़ौफ़ शायर डा.नरेश सागर
गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज



