
चलती है मस्त बयार फागुन आया है।
मौसम ने किया शृंगार फागुन आया है।।
सरसों हंसी खेतों में पीत चुनरिया ओढ़े,
डाली -डाली कोयलिया मधुर सुरों को जोड़े।
मन मस्ती से झूम उठा है ,फागुन आया है,
धरती गाये अंबर नाचे,फागुन आया है।
चलती है मस्त बयार फागुन आया है।
मौसम ने किया शृंगार फागुन आया है।।
रंगों की पिचकारी ले साजन मुस्काता है,
भीनी-भीनी खुशबू से आँगन महकाता है,
हर दिल में प्यार अपार भरा, फागुन आया है,
जीवन में नव उल्लास भरा, फागुन आया है।।
चलती है मस्त बयार फागुन आया है।
मौसम ने किया शृंगार फागुन आया है।।
साथी संग हँसी-ठिठोली, गीतों की झंकार,
रंगों से भीग रहे हैं तन, खुशियों की बौछार,
नाचे मन झूमी है गलियाँ, फागुन आया है,
प्रेम रस भरा पर्व मनाए ,फागुन आया है।।
चलती है मस्त बयार फागुन आया है।
मौसम ने किया शृंगार फागुन आया है।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




