साहित्य

भूलता नहीं

डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम

कभी हम मिले थे यह भूलता नहीं,
प्यार जो पाये थे वह भूलता नहीं।

अनजान अजनबी से हम थे मिले,
नयन का मिलन वह भूलता नहीं।

निगाहें जो पड़ी थी तेरे ही बदन पे,
मूक वाचाल का क्रम भूलता नहीं।

पता भी नहीं था हम मिल जायेंगे,
कयास मन में उठी वह भूलता नहीं।

बातों का क्रम चला वे चलते ही रहे,
चमक सौन्दर्य का वह भूलता नहीं।

स्नेह आंखों में था नेह दिल में लिए,
चाहत का क्रम बन्धन भूलता नहीं।

धीरे-धीरे कदम प्रेम लिए जो चले,
वो पास ला मिलन के भूलता नहीं।

दिल रमता रहा ओम दृग पलकों में,
पल मेरा हो गया वह भूलता नहीं।।
डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम

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