
बहती हुई हवाओं
जाना बासंती देश में
जहाँ खिलते गालों पे गुलाब
गोरी शरमाए बासंती वेश में!
जहाँ खिलते गेंदा, गुलदाउदी
मुस्काते गुलमोहर, कचनार
फूलों की सुरभित घाटी में
तितली डोले पंख पसार!
ले आना सुरभि मनभावन
खिल-खिल हँसी और उल्लास
बटोर लाना सतरंगी पंखुड़ियां
रख लूंगी मैं अपने पास!
मन के बासंती देश में
पतझर का मौसम उतरे न
समेट लूँ सौंदर्य नयन में
बसंत का मौसम बीते न!
मीना जैन इंदिरापुरम गाजियाबाद




