साहित्य

चक दे इंडिया – जीत का स्वर्णिम अध्याय

अतुल पाठक

जब-जब मैदान में उतरी भारत की शान,
तब-तब गूँजा हर दिल में विजय का गान।
नीले रंग की जर्सी में साहस की ज्योति थी,
हर खिलाड़ी के मन में बस देशभक्ति की प्रीति थी।
बल्ले की गूंज से आसमान भी मुस्काया,
गेंद की रफ्तार ने इतिहास नया बनाया।
हर चौका-छक्का जैसे तिरंगा लहराता था,
हर विकेट पर पूरा देश झूम उठ जाता था।
संघर्षों की राहों से गुजरते हुए वीर,
लिख गए मैदान में साहस की नई लकीर।
पसीने की हर बूंद में सपनों की चमक थी,
भारत की जीत में 140 करोड़ दिलों की दमक थी।
जब अंतिम पल आया और जीत करीब थी,
हर धड़कन में बस भारत की ही नसीब थी।
फिर गूँजा मैदान – “भारत माता की जय”,
हर आँख में खुशी थी, हर दिल में उत्सव नया।
यह सिर्फ एक मैच की जीत नहीं थी,
यह पूरे भारत की उम्मीदों की रीत थी।
साहस, मेहनत और विश्वास का यह ताज,
भारत ने फिर पहन लिया विश्व विजेता का राज।
आज तिरंगा फिर गर्व से लहराया है,
भारत ने विश्व में अपना लोहा मनवाया है।
यह जीत केवल खिलाड़ियों की कहानी नहीं,
यह 140 करोड़ सपनों की रवानी है।
चलो मिलकर इस विजय का सम्मान करें,
हर खिलाड़ी को दिल से प्रणाम करें।
क्योंकि जब-जब भारत का परचम लहराएगा,
हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा हो जाएगा।

अतुल पाठक
हाथरस(उत्तर प्रदेश)

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