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वैश्विक मंच यूबीआई की 8वीं वर्षगांठ पर “यूबीआईफेस्ट डिजिटल ज़िंदगी” का भव्य आयोजन

डिजिटल मंच पर साहित्य, कला, संगीत, स्वास्थ्य और समाजसेवा का उत्सव मनाने भारत, सिंगापुर, दुबई, यूके, अमेरिका, न्यूज़ीलैंड, बहरीन, केन्या, इंडोनेशिया और जर्मनी से एक साथ जुड़ा यूबीआई परिवार

दो विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने वाले अंतरराष्ट्रीय मंच यूबीआई – यूनाइटेड बाय इंक की 8वीं वर्षगांठ के अवसर पर 1 फरवरी से 15 फरवरी तक “यूबीआईफेस्ट डिजिटल ज़िंदगी” का भव्य ऑनलाइन उत्सव टीम यूबीआई द्वारा आयोजित किया गया। यह आयोजन यूबीआई की संस्थापिका सपना शिवानी केकरे के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस पखवाड़े के दौरान कुल 30 शानदार ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका सीधा प्रसारण यू-ट्यूब पर किया गया। इस आयोजन की विशेषता यह रही कि सभी 30 कार्यक्रमों का संचालन 30 अलग-अलग ऊर्जावान संचालकों द्वारा किया गया।
1 फरवरी को कार्यक्रम का उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ, जिसमें प्रसिद्ध कवि एवं ग़ज़लकार डॉ. लक्ष्मी शंकर बाजपेयी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा विशिष्ट अतिथि ममता किरण थीं। इस अवसर पर उन्होंने “लाला लालचंद फलक पारितोषिक (आजीवन उपलब्धि सम्मान)” के लिए आदरणीय सुरजीत सिंह और आदरणीय अनिल कुलश्रेष्ठ के नामों की घोषणा की।
यूबीआई की गुरुमाई माननीय किरण लंगर के कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ उत्सव का शुभारंभ हुआ।
2 फरवरी को यूबीआई की 8वीं वर्षगांठ के अवसर पर केक काटकर समारोह मनाया गया। इस अवसर पर विशेष अतिथि डॉ. मनीष विश्नोई द्वारा दो “विशिष्ट मशालवाहक सम्मान” आदरणीय कमला मुलानी और आदरणीय रीटा बधवार को प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त वर्षों से यूबीआई की मशाल को आगे बढ़ाने वाले 40 मशालवाहकों तथा 62 यूबीआई डायमंड सदस्यों को भी सम्मानित किया गया।
यूबीआईफेस्ट 2026 के अवसर पर सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को आगे बढ़ाते हुए ‘अपनी शाला’ के माध्यम से वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए सहयोग प्रदान किया गया। यह पहल शिक्षा के माध्यम से उज्ज्वल भविष्य निर्माण की दिशा में एक छोटा लेकिन सार्थक कदम है।
कार्यक्रम के दौरान 23 लेखकों द्वारा उनकी 200 से अधिक पुस्तकें पुरस्कार स्वरूप यूबीआई सदस्यों तथा मुंबई के विभिन्न सरकारी विद्यालयों को भेंट की गईं। विशेष उल्लेख लेखक पुनीत ओझा का रहा, जिन्होंने 50 से अधिक पुस्तकें प्रदान कीं, जबकि रवि भाटिया और भावना सेठी ने 10-10 पुस्तकें भेंट कीं।
उत्सव के अंतर्गत लेखक मंच, दिव्य दीप, अंगदान जागरूकता कार्यक्रम, भजनोत्सव, काव्योत्सव, बहुभाषी कविता गोष्ठी, कथा सागर, सुर संगम, नृत्य प्रस्तुतियाँ, डिजिटल नाट्य प्रस्तुति, डिजिटल युग में स्वास्थ्य, रसोई कला प्रतियोगिता, डिजिटल कलाकारों की परिचर्चा, तीन दिवसीय निःशुल्क ग़ज़ल कार्यशाला, कहानी कहने की शक्ति तथा बच्चों के लिए नवांकुर गोष्ठी जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कुछ सत्रों को क्रीम कुट्योर, एकदंत डेंटल क्लिनिक, नर्चरिंग फेसेट्स और द बुक ब्रैकेट द्वारा प्रायोजित किया गया।
इसके साथ ही 3 फरवरी से 13 फरवरी तक फेसबुक समूहों पर लेखन, भोजन, स्वास्थ्य, संगीत, कला और सकारात्मकता से जुड़ी ऑनलाइन मैराथन और बाल प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की गईं। इस दौरान 350 से अधिक ई-प्रमाणपत्र प्रदान किए गए तथा प्रतियोगिताओं के 31 विजेताओं को ट्रॉफी, सम्मान पत्र और उपहार स्वरूप एक पुस्तक उनके निवास स्थान पर भेजी गई।
यूबीआईफेस्ट डिजिटल ज़िंदगी ने यह सिद्ध कर दिया कि डिजिटल मंच पर भी साहित्य, कला, संवेदना और सामूहिकता का उत्सव पूरी गरिमा और ऊर्जा के साथ मनाया जा सकता है।

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