
उंगलियों में शब्द बनकर,
दिल की धड़कन रख देती हूँ,
जो कह न पायी कभी जुबाँ से,
उसे काग़ज़ पर लिख देती हूँ।
दो दिलों के बीच की दूरी,
कुछ लफ़्ज़ों से मिट जाती है,
ख़ामोश नज़रों की ज़ुबान भी,
स्याही बन सब लिख जाती है।
हर पंक्ति में छुपा है एहसास,
हर अक्षर में है मेरा विश्वास,
जो पल तुमने मेरे संग जिए,
वे बन गए मेरी यादों का इतिहास।
जब भी तन्हाई घेरेगी मन को,
मेरा ये पत्र तुम्हें पास बुलाएगा,
बीते लम्हों की प्यारी यादें लेकर,
ये दिल फिर से मुस्कुराएगा।
पत्र लिखते हुए खुद को जाना,
अपने भीतर मैं झाँक पायी हूँ,
प्रेम के शब्दों के सहारे,
मैं खुद से भी मिल आयी हूँ।
क्योंकि,
प्रेमपत्र सिर्फ़ संदेश नहीं है
ये दो आत्माओं का संवाद है,
जो रिश्तों को गहराई देता, और
सच्चे प्रेम की शुरुआत करता है।
स्वरचित मौलिक रचना
सुमन बिष्ट, नोएडा




