
राजनीति में मेरा कोई लगाव नहीं,
कोई नेता मंत्री बन कर आ जाये,
मेरा उसके वादों में विश्वास नहीं,
हाँ,मेरी नेतागीरी की औक़ात नहीं।
उनका नेह निमंत्रण एक धोखा है,
जो राजनीति सत्ता की ख़ातिर है,
सत्ता पाकर फिर वो भूल जाएँगे,
मित्रता व रिश्ते भी बदल जाएँगे।
ये वादे तो उन्हें अपनी जनता से
पाँच वर्ष तक निभाना ही चाहिए,
वादे निभाते निभाते यदि वो गलत
न हों तो सिर नहीं झुकाना चाहिए।
आदित्य ऐसा होता नहीं राजनीति में,
न वादे निभाते हैं न सिर झुकाते है,
अगले चुनाव के पहले प्रचार करने
कोहनी तक हाथ जोड़ चले आते हैं।
डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ




