आलेख

श्रीलंका जैसे मिसाल

ललन प्रसाद सिंह

हाल ही में श्रीलंका का संसद और सांसद ने दुनिया में एक अमूल्य उदाहरण पेश किया है सरकार द्वारा दिए जाने वाले सैलरी और सुविधाओं का त्याग कर।
भारतीय संसद के ये दो सांसदों :
श्री नवीन जिंदल (Naveen Jindal): भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुरुक्षेत्र से सांसद।
डॉ. बिमोल अकोइजाम अंगोमचा (Dr. Bimol Akoijam Angomcha): कांग्रेस (Congress) के इनर मणिपुर से सांसद।
इन्होंने सेवा का सकारात्मक मिसाल पेश किया है भारत में । चलो शुरुआत तो हुई। छोटे से देश श्री लंका जब ऐसा कर सकता है तो हम क्यूं नहीं? चलो देर-सबेर …! ये उन नेताओं को जो पैसे और प्रभुत्व के लिए राजनीति में आते हैं ।उनके मुंह पर जोरदार तमाचा है। कुछ तो ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। राजनीति विशुद्ध रूप से समाज की सेवा भावना का क्षेत्र है । आज बहुत सांसद ऐसे आ रहे हैं जिन्हें इसके अर्थ का भान भी नहीं है। संसद में समय-समय पर ऐसे 10-20 प्रश्नों का उत्तर सांसदों से गुप्त रूप से लेना चाहिए और उस आधार पर उनकी रैंकिंग 3-6 माह पर आवश्य करनी चाहिए। इससे चुने गए सदस्यों में सदन के प्रति जिम्मेवारी का एहसास हो सकेगा। निश्चित रूप से सदन की गरिमा और गुणवत्ता अक्षुण्ण रह पाएंगे।इसका गहरा असर देश के नागरिकों पर भी पड़ेगा।
ललन प्रसाद सिंह,
एक सामाजिक चिंतक और लेखक,
नई दिल्ली-70

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!