साहित्य

पी ओ के की आजादी

शायर देव मेहरानियाँ

अब बस एक ही जतन करें ,पी ओ के की आजादी का।
एक नया इतिहास लिखें हम, दुश्मन की बर्बादी का।।

हटी तीन सौ सत्तर कुछ,माहौल घाटी का शान्त हुआ,
नहीं रास आया दुश्मन को,मन था बहुत क्लान्त हुआ,
जीते जी प्राणान्त हुआ, मोह छूट सका ना वादी का।
एक नया इतिहास लिखें,हम दुश्मन की बर्बादी का।।

बना है आतंकी अड्डा ,मिल रहा है साथ पड़ोसी का,
करी हिमाकत अब फिर कोई, सर काटेंगे दोषी का,
करें लहू से तिलक आज,नर मुंडों की शहजादी का।
एक नया इतिहास लिखें हम, दुश्मन की बर्बादी का।।

भूल गया क्यों पिछ्ली मार,फन फिर से नाग तू उठा रहा
अमन चैन तुझे रास न आता आतंकी सब बुला रहा
मौत की नींद तू सुला रहा,साथी बनता हर वादी का
एक नया इतिहास लिखें हम, दुश्मन की बर्बादी का।।

भारत माता के दामन, पर अब जो भी दाग लगायेगा।
सौगन्ध हमें माँ काली की, वो कभी नहीं बच पायेगा।
बना उसे फिर हम मेहमाँ दें,मरघट की आबादी का।
एक नया इतिहास लिखें हम, दुश्मन की बर्बादी का।।

जुल्मों सितम तो बहुत सह लिये,अब तो प्रतिकार करो
ओ!महलों के सिंहासन जादो, खुल्ला अब यलगार करो
थर्राएँ दुश्मन देख जिगर, कैसे बना ये ‘देव’ फौलादी का
एक नया इतिहास लिखें हम, दुश्मन की बर्बादी का

अब बस एक ही जतन करें ,पी ओ के की आजादी।
एक नया इतिहास लिखें हम, दुश्मन की बर्बादी का।
शायर देव मेहरानियाँ

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