साहित्य

कविता

डॉ अवधेश सिंह गौतम

हम देश की बेटियां हैं साहब
अब सपनो को सच कर दिखाएंगे
जो रोका गया सदियों से, राह बना दिखाएंगे

ना घुंघट में अब कैद हम रहेंगे
ना ही डर की दीवारों में हम सिमटेगी
किताबों को अपना साथी बना कर
हम आसमान की छू आयेंगे
कॉलेज की ओर बढ़ रहे कदम हमारा
अब हर मंजिल हमारे पास चल कर आयेंगे
मेहनत की आग लगी हमारे दिलों में
अब हर मुश्किल को आसन बना दिखाएंगे
हम कलम उड़ाएंगे ज्ञान हम में समाएंगे
हम देश की बेटियां हैं साहब,अब भी कॉलेज करने जायेगे

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