
उड़ान भरनी हैं मुझे ,
ऊंचाइयों कि उड़ान
सच्चाइयों कि उड़ान
बिना डरे, बिना सहमे
उड़ना है मुझे
ना किसी की साथ की ,ना किसी के विश्वास की जरूरत है मुझे।
बस उड़ना है मुझे।
में कर सकती हूं सब , अब ठान लिया हैं।
में अब नहीं रुकूंगी, ये मान लिया हैं।
बस उड़ना है मुझे।
– रिया राणावत
कालीदेवी , झाबुआ (मध्य प्रदेश)




