साहित्य

मैं और मेरा काव्य

शशि कांत श्रीवास्तव

मैं कौन हूँ
क्या ,पहचान है मेरी
यही की …,मैं,
शब्दों की पिरोयी हुई एक माला हूँ
जिसमें….
तराना है -मन के भावों की,
किसी के मिलन की,
या , वियोग की,
क्या ,यही पहचान है मेरी …?
मैं और मेरा काव्य ,
जो रहते हैं सदा संग हमारे
जीवन के हर मोड़ पर,
सुख में भी -दुःख में भी,
मन के अन्तस से निकले उद्धगार -जो,
लेती है शक्ल एक खूबसूरत सी कृति का,
और …,
सँवारती है जीवन के उतार चढ़ाव को
शब्दों की डोर से ,
मैं और मेरा काव्य …., ||

शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब
©स्वरचित मौलिक रचना
21-03-2026

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