

झोली भरने , आओ माँ, नवरात्रे में ,घर – द्वार हमारे।
कृपा करो माँ ,दुख हरना,दुनिया पूजे, दर खड़ी तुम्हारे।।
मंदिर आएँ , भक्त सभी , सजा दरबार, जन सुने कहानी।
ढोल बजे हैं , पाठ करें , चौकी बैठी,तुम लगो सुहानी।।
मैया रानी , छंद रचूँ, वर को देना, माँ ! मिले सहारा।
महिमा गाऊँ , भजनों में , मातु शारदा,न करना किनारा।।
अद्भुत प्यारा, रूप लगे, नौ स्वरूप में,तू दिखे भवानी।
हे शैल सुता, कूष्मांडा, चंद्र घँटा माँ, दो मुझे निशानी।।
डॉ. मंजु गुप्ता



