साहित्य

मुझे मिल गया मन का मीत

शिवानी दीक्षित 'महक '

मुझे मिल गया मन का मीत
झंकृत हुई हर्ष की सरगम ,
मीत से जुड़ी सजी एक प्रीत
गाथा शाश्वत भाव मधुरम।

अल्पाक्षर से विस्तार करूं
ये मिथ्या सा ही लगता है ,
महिमा का वर्णन करना पर
हर शब्द अधूरा लगता है ।

जब भ्रम का जाल टूट जाए
वह आध्यात्म की शक्ति है ,
सिंधु में बिंदु रहा समा
यह तो भक्ति की ही शक्ति है ।

वह सफर जहां ले जाएगा
मीत से प्रीत ,प्रीत से रीत ,
देखेंगे कि बन जाएगा
जीवन का एक मधुर संगीत ।

शिवानी दीक्षित ‘महक ‘
चंदौसी संभल
7302114958

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