
जो भी करोगे अच्छा
प्रभु जी तुम्हारी इच्छा।
पार लगाओगे तुम ही
मैं हूं तुम्हारा बच्चा।
दुख दर्द जब सताए
तुम याद बहुत
हो आए
प्रभु स्वस्थ सब हो जाएं
यही हो तुम्हारी इच्छा।
तुम प्यार सबसे करते हो।
ख्याल सभी का करते हो।
उत्पात अन्याय पर मानव जब उतर आए।
तो तुम भी क्या कर सकते हो?
बुद्धि सभी को दी है
प्रयोग मानव ने गलत की है।
कर्मों की ऐसी सजा देने कीनहीं थी तुम्हारी इच्छा।
हर बच्चा है तुम्हारा बच्चा।
संसार के हर बच्चे को तुम प्यार बहुत करते हो।
कर्मों का फल तो मिलेगा।
दुख दर्द कैसे बचा सकते हो।
संसार में जो बांटते हो मानव,
वही तो वापस मिलेगा।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा




