
बीस बरस यूँ बीत गए, जैसे एक ही पल हो,
कुलदीप के संग ऋतु का हर दिन सुनहरा कल हो।
हाथों में हाथ रहा, हर मुश्किल आसान बनी,
तेरी मेरी ये डोरी, हर मौसम में मुस्कान बनी।
रूठे भी तो प्यार से, फिर खुद ही मान गए,
जीवन की हर राह में, एक दूजे के जान बने।
ये रिश्ता यूँ ही महके, हर जन्म का साथ बने,
हँसी-खुशी ये जीवन, हर दिन नई बात बने।
रब से बस यही दुआ, ये प्यार सदा यूँ ही रहे,
कुलदीप-ऋतु का संग, हर पल गीत बना ही रहे !
बीस साल की यादें आज फिर ताजा हो गई
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश



