आसान नहीं होता
सिद्धार्थ से बुद्ध हो पाना
भावनाओं से सहज मुक्ति भी आसान नहीं होती,
मन वचन और कर्म से
इन्द्रियातीत हो,आत्मलीन हो जाना,
यह भी सरल नहीं था, सिद्धार्थ!
पर तुमने जीत लिया था मन को सहज ही,
संसार से दूर
मन की विचार वीथियो में
भटकते अनगिनत सवालों को भेदकर
ज्ञान के प्रकाश को,खोज निकाला
तुम विजयी रहे,
नश्वर है विश्व का कण कण
पर शाश्र्वत है मानवता,दया,करुणा, संवेदना
जीवन की पवित्रता
यही है धर्म,यही संस्कार है मन का
बुद्ध हो तुम,!
नमन जगती के कण कण में बसी उस भावना के धन
नमन है,,,बुद्ध हो तुम!!…पद्मा मिश्रा.जमशेदपुर



