
अगर मैं बन जाऊं यमराज तो स्टाइल निराला होगा,
भैंसे की जगह बुलेट होगी, एंट्री पे धमाका होगा!
काला चश्मा आंखों पे, जैकेट चमचम वाली,
देख मुझे आत्माएं बोलें आ गए हीरो वाली!
चित्रगुप्त जी को बोलूं अब पेपर छोड़ो यार,
लैपटॉप ले लो हाथ में, बन जाओ तुम सुपरस्टार!
फाइलों की जगह टैबलेट हो, डेटा सब ऑनलाइन,
यमलोक भी डिजिटल होगा, जैसे कोई डिज़ाइन।
जिसको लेने जाऊं मैं, पहले कॉल लगाऊं,
भाई तैयार हो जाओ, मैं लेने खुद आऊं!
कोई बोले—“थोड़ा टाइम दे दो”, मैं हंसकर कह जाऊं,
ठीक है भाई, एक दिन और… पर फिर सीधे ले जाऊं!
स्वर्ग में DJ बजवा दूं, नरक में हल्का म्यूजिक,
दोनों जगह माहौल बनाऊं,फुल ऑन एंटरटेनमेंट बेसिक।
जो अच्छे कर्म करेगा, उसको गोल्डन पास दिलाऊं,
VIP लाइन में भेजूं, सीधे स्वर्ग पहुंचाऊं।
और जो ज्यादा चालाकी करे, उसको प्यार से समझाऊं,
“भाई सुधर जा अभी भी, वरना फिर मैं ही आऊं!
मैं यमराज बन जाऊं अगर, तो डर सबका मिट जाएगा,
हंसी-मजाक के इस चक्कर में, हर कोई मुस्काएगा।
जीवन का असली मतलब, हंसते-हंसते समझाऊं,
ऊपर-नीचे दोनों जगह, खुशियों का रंग जमाऊं!
कुलदीप सिंह रुहेला
मौलिक अप्रकाशित रचना
सहारनपुर उत्तर प्रदेश



