
तपती धरती आज बिलखती, कैसे हम मुस्काऍं।
आओ वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचाऍं।।
हरियाली का गहना देकर, कोना सभी सजाना।
रोपण करके पौध प्रेम का , जग में अलख जगाना।।
मिले पथिक को छाया शीतल, मिलकर हाथ बढाऍं।
आओ ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचाऍं।।१
ताल – तलैया नदियाॅं पनघट, सूखे-सूखे सारे।
बाग- बगीचे उजड़े बिखरे, जीव फिरे हैं मारे।।
बढ़े कदम यह शपथ लिए हम, वसुधा को महकाऍं।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचाऍं।।२
प्राणवायु की घटती उर्जा,घुट- घुट प्राणी जीते।
अपनी ही नादानी पर वे,घूॅंट जहर का पीते।।
प्रकृति – नियम का पालन करके, हरियाली फिर लाऍं।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचाऍं।।३
ऑंवा सी वसुधा यह तपती, त्राहि मची है भारी।
झुलस गए तरुवर के पाती, फैल रही बीमारी।।
मानव की इस स्वार्थ वृत्ति को, मिलकर चलो मिटाऍं।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचाऍं।।४
वृक्षों से हम जीवन पाते ,द्रुम नैनों को भाते।
पिता तुल्य हैं वृक्ष धरा पर, वेद-पुराण बताते।।
वृक्षारोपण कर्म पुण्य का, जन-जन को बतलाऍं।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचाऍं।।५
भाॅंति- भाॅंति के संसाधन से, हम निज निलय सजाते।
भूख मिटाने को फल खाते, सेहत सुघड़ बनाते।।
रोग- व्याधि को हरते पादप, सदा लाभ पहुॅंचाऍं।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचाऍं।।६
गाॅंठ – बाॅंध लो बात पते की, अब तो दोहन छोड़ो।
जीवन- रक्षक तरुवर रोपो, सुख से नाता जोड़ो।।
पूजनीय यह प्रकृति सदा है, नित गुण पावन गाऍं।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचाऍं।।७
सुनीता सिंह सरोवर 🙏 🙏




