
ये तन मिट्टी का है भोले,
आकर बस जाओ तुम भोले,
रीत अनोखी होगी भोले,
प्रीत में बंध जाओ तुम भोले।
ये तन मिट्टी ….
प्रेम की सीढ़ी सबसे ऊंची,
चढ़कर तुम आ जाओ भोले,
जीत सदा जीवन की होगी,
सत्य रूप में आओ भोले।
ये तन मिट्टी …..
जब-जब भाव शून्य होता मन,
भक्ति की अलख जलाओ भोले,
हम-तुम दोनों बस जाएं बस,
इतनी जगह बनाओ भोले।
ये तन मिट्टी ….
मद्धिम-मद्धिम पवन बह रही,
सुरभित तुम कर जाओ भोले,
तिनका-तिनका इस माटी का,
गीत तुम्हारे गाए भोले।
ये तन मिट्टी ……
आओ हम सब रच-बस जाएं,
भोले के इस मेले में,
धरा आसमां नाच उठे फिर,
मन मिल जाए भोले में।
ये तन मिट्टी …
(262/320 वां मनका)
लगातार 5 वर्ष पूर्ण
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कार्तिकेय सीताराम त्रिपाठी
सी स्पेशल गांधीनगर, इन्दौर




