आलेख

पृथ्वी दिवस 2026 : हमारी शक्ति, हमारा ग्रह बचाने का संकल्प

सुनील कुमार महला

22 अप्रैल पृथ्वी दिवस पर विशेष आलेख

22 अप्रैल का दिन अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे विश्वभर में पृथ्वी दिवस (अर्थ डे) के रूप में मनाया जाता है। यह केवल पृथ्वी पर चर्चा का दिन नहीं, बल्कि धरती को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने, वृक्षारोपण करने, जल संरक्षण अपनाने तथा टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने का संकल्प दिवस है।बहुत से पाठक शायद यह नहीं जानते होंगे कि विश्व में दो बार पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। एक आयोजन संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रत्येक वर्ष मार्च विषुव के अवसर पर किया जाता है, जबकि 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस अधिक लोकप्रिय, व्यापक और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है।इस दिवस की शुरुआत अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने वर्ष 1970 में की थी। वहीं ‘ अर्थ डे’ नाम देने का श्रेय जूलियन कोनिग को जाता है। उन्होंने यह नाम इसलिए चुना क्योंकि ‘अर्थ डे’ शब्द ‘जन्मदिन'(बर्थडे) से तुकबंदी करता है, और संयोगवश 22 अप्रैल उनका जन्मदिन भी था।22 अप्रैल की तिथि भी सोच-समझकर चुनी गई थी। आयोजकों का उद्देश्य था कि कॉलेजों के विद्यार्थी बड़ी संख्या में इसमें भाग लें। उस समय अमेरिका में यह दिन स्प्रिंग ब्रेक और अंतिम परीक्षाओं के बीच आता था, जब विद्यार्थी अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय और उपलब्ध रहते थे।वर्ष 1970 में जब पहला पृथ्वी दिवस मनाया गया, तब लगभग 2 करोड़ लोग सड़कों पर उतर आए थे। इसे पर्यावरण समर्थन का अब तक का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण जनआंदोलन माना जाता है। यही आंदोलन आगे चलकर वैश्विक पर्यावरण चेतना का आधार बना।पृथ्वी दिवस का एक आधिकारिक ध्वज भी है, जिसे इको-फ्लैग कहा जाता है। इसे वर्ष 1969 में रॉन कोब ने तैयार किया था। इसमें गहरे हरे रंग की पृष्ठभूमि पर पीले रंग का प्रतीक अंकित है, जो अंग्रेजी अक्षर ‘इ’ (एनवायरनमेंट) और ‘ओ’ (आर्गेनिज्म) के संयोजन का प्रतीक माना जाता है।इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण जलवायु समझौता पेरिस समझौता भी 22 अप्रैल 2016 अर्थात पृथ्वी दिवस के दिन हस्ताक्षर हेतु खोला गया था। 170 से अधिक देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए, जिससे यह वैश्विक पर्यावरण इतिहास की महत्वपूर्ण घटना बन गया।

समय-समय पर पृथ्वी संरक्षण के लिए अनेक आंदोलन हुए हैं। इन आंदोलनों का प्रभाव इतना व्यापक रहा कि इक्वाडोर और बोलीविया जैसे देशों ने अपने संविधान में प्रकृति को कानूनी अधिकार प्रदान किए। अर्थात वहाँ प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि संरक्षित अधिकारों वाली इकाई मानी जाती है।गौरतलब है कि वर्ष 2026 में विश्व के प्रमुख पर्यावरण संगठनों में से एक द नेचर कंजर्वेंसी अपनी स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस अवसर पर पृथ्वी दिवस के साथ मिलकर विश्वभर में प्राकृतिक आवासों के पुनर्जीवन हेतु बड़े स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष पहली बार पृथ्वी दिवस कार्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और नेक्स्ट जेनरेशन सैटेलाइट्स का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। ये उपग्रह जंगलों की कटाई, समुद्र के बढ़ते जलस्तर तथा जलवायु परिवर्तन जैसे पर्यावरणीय परिवर्तनों का रियल-टाइम डेटा उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे आम नागरिक भी अपने मोबाइल पर अपने क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति देख सकते हैं।वर्ष 2026 के आयोजनों में भारत का मिशन लाइफ वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत सौर ऊर्जा की बढ़ती क्षमता तथा इंटरनेशनल सोलर एलायंस के माध्यम से विश्व को प्रकृति-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का संदेश दे रहा है।ताज़ा वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार 2025 से 2029 तक का समय अब तक का सबसे गर्म काल रहने की आशंका है। इसलिए 2026 का पृथ्वी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक आपातकालीन चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें 1.5°C तापमान लक्ष्य को बचाने की अपील की जा रही है।

पृथ्वी दिवस केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसके प्रभाव से अमेरिका में ‘क्लीन एयर एक्ट’,’ क्लीन वाटर एक्ट’,’ और ‘एनडेंजर्ड स्पेशीज एक्ट’ जैसे कठोर कानून लागू हुए, जिन्होंने वैश्विक पर्यावरण नीतियों की दिशा तय की।आज हमारी पृथ्वी, जिसे नीला ग्रह भी कहा जाता है, जल, वायु, ध्वनि, मृदा तथा प्लास्टिक प्रदूषण जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रही है। विश्व की लगातार बढ़ती जनसंख्या, अंधाधुंध औद्योगिकीकरण, वनों की अविवेकपूर्ण कटाई, जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन पृथ्वी के संतुलन और पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ रहा है।ग्लोबल वार्मिंग के कारण ध्रुवीय बर्फ पिघल रही है, समुद्र स्तर बढ़ रहा है और संपूर्ण जीव-जगत संकट की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में पृथ्वी दिवस का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

पृथ्वी दिवस की थीम प्रत्येक वर्ष नई दिशा देती है। वर्ष 2026 की थीम है-‘ अवर पावर,अवर प्लेनेट’ (हमारी शक्ति, हमारा ग्रह)। वास्तव में, इस थीम का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत और सामुदायिक शक्ति को रेखांकित करना है। यह हमें याद दिलाती है कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव ही वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं। वर्ष 2026 का अभियान नागरिक एकजुटता और लोकतांत्रिक कार्रवाई पर केंद्रित है। यह थीम बताती है कि पृथ्वी को बचाने की सामूहिक शक्ति हम सभी के पास है।यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व वर्ष 2024 की थीम ‘ प्लेनेट वर्सेज प्लास्टिक’ थी, जिसका उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण के विरुद्ध वैश्विक चेतना जगाना था। वहीं वर्ष 2022 और वर्ष 2023 की थीम ‘इनवेस्ट इन अवर प्लेनेट'(हमारे ग्रह में निवेश करें) थी।

हाल फिलहाल, यहां पाठकों को बताता चलूं कि हमारी भारतीय सनातन संस्कृति में पृथ्वी को माता माना गया है। अथर्ववेद में कहा गया है-‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।’ अर्थात पृथ्वी हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं। वास्तव में हमारी सनातन परंपराएं व संस्कृति हमें यह सिखाती है कि पृथ्वी केवल भूमि नहीं, बल्कि जीवनदायिनी शक्ति है। अतः हमें ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे धरती मां के मर्म को चोट पहुँचे। अधिकाधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत, प्लास्टिक का त्याग, संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील जीवनशैली अपनाना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

वास्तव में, 22 अप्रैल का यह दिन हमें स्मरण कराता है कि हम सभी पृथ्वी माता की संतान हैं, और इसकी रक्षा करना केवल हमारा दायित्व ही नहीं, बल्कि नैतिक धर्म भी है। पृथ्वी और इसके पर्यावरण का संरक्षण किसी एक देश या संस्था का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की साझा जिम्मेदारी है।आज के आधुनिक विकास के बीच प्रकृति की पुनर्स्थापना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, संतुलित और समृद्ध ग्रह मिल सके। अंत में, यदि हम एक वाक्य में कहें तो पृथ्वी दिवस का सार है-‘स्वस्थ ग्रह(हमारी धरती/नीला ग्रह), समृद्ध भविष्य’, जिसे हम अपनी सक्रिय भागीदारी से ही प्राप्त कर सकते हैं।

-सुनील कुमार महला, फ्रीलांस राइटर, कॉलमिस्ट व युवा साहित्यकार, पिथौरागढ़, उत्तराखंड।मोबाइल 9828108858

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