
गोरखपुर।हर साल 1 अगस्त को विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरूक करना और समय पर जांच व उपचार के लिए प्रेरित करना है।
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रूप कुमार बनर्जी ने बताया कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही नहीं होता। वायु प्रदूषण, औद्योगिक रसायन, परोक्ष धूम्रपान, आनुवंशिक कारण और अस्वस्थ जीवनशैली भी इसके बड़े कारण हैं।
धूम्रपान-तंबाकू सेवन करने वाले, प्रदूषित इलाकों में रहने वाले, एस्बेस्टस-रसायनों के संपर्क में रहने वाले, परिवार में कैंसर का इतिहास रखने वाले और 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग। इसके लक्षणों के विषय में।डाक्टर रुप कुमार बनर्जी ने बताया कि अगर 3 हफ्ते से ज्यादा खांसी, खांसी में खून, सांस फूलना, सीने में दर्द, आवाज बैठना, बिना वजह वजन घटना और बार-बार फेफड़ों का संक्रमण। शुरुआती पहचान से इलाज की सफलता कई गुना बढ़ जाती है।
उन्होंने बचाव के उपाय में बताया कि धूम्रपान छोड़ें, स्वच्छ वातावरण रखें, नियमित योग-व्यायाम करें, पौष्टिक भोजन लें और लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से जांच कराएं।
डॉ. बनर्जी ने कहा कि होम्योपैथी में व्यक्ति की पूरी शारीरिक-मानसिक स्थिति को देखकर उपचार किया जाता है, जो शुरुआती अवस्था में बीमारी को आगे बढ़ने से रोकने में मददगार हो सकता है। इलाज हमेशा प्रशिक्षित चिकित्सक के परामर्श से ही लें।




