साहित्य

सावन आया

डॉ. दक्षा जोशी

धरा की श्यामल धड़कन पे

हर एक बूँद का है साया ,

तपिश में सुप्त बीजों को

किसी ने आज है बुलाया।

गगन के शून्य से उतरा

अनाम सा कोई संबल,

हमारे सूनेपन में आज क्या

यह अक्रूर है आया ?

नमी के स्पर्श भर से टूटती हैं

पीर की दीवारें,

हृदय के बंजरों में

कौन सा करुणा-प्रवाह है आया ?

नज़र के पार की दुनिया

बहुत ख़ामोश है, लेकिन,

भरी बरसात में भीतर

कोई तूफ़ान है छाया ।

अनोखा मोड़ है यह

ज़िंदगी की इस यात्रा का,

जहाँ हर अश्क़ में देखो

नया सावन है समाया।

 

-डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’

अहमदाबाद,गुजरात।

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