
शीर्षक- कलम का सिपाही
संघर्ष, शक्ति, संकल्प भर जा,
कलम के सिपाही आज तू रंग भर जा!
भूमि में फिर लिख कर गबन, गोदान तू,
प्रेम का चंदन लगाया सेवासदन के द्वार पर।
जीवन दलित, दारुण दिखाया,
हवेलियां जमींदार की, सच बतलाया!
राष्ट्रहित की चेतना चित्त में उतारा आपने,
शोषितों, दलितों, गरीबों को, शब्दों में संवारा आपने।
पूस की रात और हल्कू का जाड़ा,
पंच परमेश्वर ने न्याय को गढ़ा,
ईदगाह में हामिद का वह चिमटा प्यारा,
बन गया तू हर एक बेकस का सहारा।
हे कलम के बेताज बादशाह, शत-शत नमन!
तेरा हर एक पन्ना, जैसे पावन हवन।
स्वरचित
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश




