साहित्य

संतुलित आबादी

कविता नामदेव

ठहरता आसमान रुकती जमीन कहती
सिमट गई नदियां टूट गए पर्वत

कट गए , छाव देते हुए वृक्ष
आओ अलख यह जगाते चले

पृथ्वी संरक्षण पर नियंत्रण करते चलें
बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगाओ

धरती माँ को ज्यादा ना दबाओ
प्रकृति से है जीवन सभी का

हरियाली का पोषण बढ़ाते चलो
आबादी को थोड़ा घटाओ

स्वच्छ हवा पानी थोड़ा बढ़ाओ
बेहतर शिक्षा स्थाई भविष्य

जनसंख्या आवश्यकता से अधिक नहीं
छोटा परिवार उज्जवल भविष्य

योजना ऐसी संतुलित हो आबादी
आबादी से बर्बादी समझ स्वार्थी मानव

जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता दिखाओ
मानव गरिमा का सम्मान करो और कराओ

” कविता नामदेव “,…. नजीबाबाद बिजनौर (उ.प्र)

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