
तरु छाया के दातार, लगाए आओ मिलकर सारे।
तरु से ही जीवन जान, यही वसुधा के पालन हारे।।
उपयोगी होते वृक्ष, धरा की शोभा सदा बढ़ाते।
शीतल छाया सुखधाम, सभी के मन को ये हरषाते।
ये आते सबके काम, मनुज मन महकाते सरसाते।। 1
तरु डाली पर ही नीड़, सभी जीवों को जीवन देते।
नव कोपल दे अभिराम, हवा के दोषों को हर लेते।।
नित- नित हो नवल प्रयास, मनुज अब मिलकर कदम बढ़ाए।
आशा का हो संचार, सभी जन आए हाथ बॅंटाऍं।। 2
हर क्यारी में हो फूल, लताओं से हो सुघड़ बगीचे।
माली देता नित नीर, बड़े ही श्रम से उपवन सींचे।।
गंधिल बहती जब पवन, भ्रमर तब गुन- गुन गीत सुनाए।
इत – उत उड़ता बन मीत, कली से मधुरिम प्रीति निभाए।। 3
तरुवर हरते रवि ताप, धरा पर देते शीतल छाया।
मलयज की दे सौगात, दिखाते प्रभु की अद्भुत माया।।
पीपल पाकड़ शुभ नीम,बड़ी है महिमा इनकी न्यारी।
जामुन अमियाॅं के वृक्ष,हरे ये उर बीमारी सारी।। 4
वायु प्रदूषण का हरण, सदा तरु से रखनी है यारी।
होती जब ऋतु है क्रुद्ध, तबाही होती चहुँ दिश भारी।।
तरु से मिलता धन धान्य, यही हैं मीठे फल के दाता।
तरु से जुड़ते जब मनुज, धरा से निभता सुंदर नाता।। 5
तरु का करिए आभार,इसी से जीवन निशिदिन पाऍं।
साथी आओ मिल आज, धरा को अपने स्वर्ग बनाऍं।।
धाती हैं ये अनमोल, यही तो हरियाली ले आते।
जीवन होता है धन्य, वही नर सुख सारे ही पाते।। 6
तरु जीवन के वरदान, यही तो बरसाते हैं पानी।
फल देते हैं भरपूर, धरा की चूनर करते धानी।।
मानव तुम बाॅंधो गाँठ, करें हम पादप की नित पूजा।
फैला दो यह संदेश, नहीं कोई है तरु सा दूजा।। 7
सुनीता सिंह सरोवर
उत्तर प्रदेश, देवरिया




