
दिल्ली के सरकारी विद्यालयों का शिक्षा के क्षेत्र में अपना ही एक अलग मुकाम है। उच्च शिक्षित अध्यापक-अध्यापिकाएँ, ऊँची-सुविधाजनक इमारत, खुले मैदान, उच्च स्तरीय लैब अनुशासन का उत्तम संतुलन वहाँ देखने को मिलता है।
ऐसे ही एक प्रतिष्ठित विद्यालय में मैं पढ़ती थी जहॉ दाखिला होना भी अपनी प्रतिभा एवं सौभाग्य को परिभाषित करता था। शैक्षिक गतिविधियों के अतिरिक्त अन्य क्रियाकलापों एवं हस्तकला का शिक्षण भी हमारे विद्यालय में दिया जाता था।
इसी क्रम में हमें त्रिदिवसीय प्रशिक्षण हेतु मंडी हाउस ले जाया गया। उस समय मैं आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। सबको उनकी इच्छा अनुसार हस्तकला प्रशिक्षण समूह में विभाजित कर दिया गया। मैंने क्ले मिट्टी प्रशिक्षण समूह को चुना।
इस प्रशिक्षण के दौरान हमें चाक पर, दीए, बर्तन, सुंदर फूलदान बनाना सिखाया गया। क्ले मिट्टी को बनाने की प्रक्रिया भी सिखाई गई। हाथ से मिट्टी को आकार देकर तरह-तरह की मूर्तियाँ बनाना मैंने सीखा। तीन दिन के प्रशिक्षण में आनंद लेते हुए हस्तकला से जुड़ना अत्यंत रोमांचक रहा।
आज भी जब कभी समय मिलता है तो क्ले मिट्टी से मूर्तियाँ बनाना मुझे बहुत अच्छा लगता है। शैक्षिक प्रशिक्षण के साथ हस्तकला प्रशिक्षण निश्चित ही हमारे बौद्धिक स्तर में वृद्धि करता है।
डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश



