
मुझे पता है कि तुम कहीं भी नहीं हो,
फिर भी दिल कहता है तुम यहीं हो, यहीं हो
मेरी साँसों में धड़कनों में, दिल के इस घर में
बंद हो यादों में खुली आँखों के सपने जैसे
मेरे वजूद में छुपी बैठी मेरी ही छवि जैसे।

छूना चाहूँ तो छू न पाऊँ
यादों में तेरी नयनों को भिगो जाऊँ
भूलना चाहूँ पर भूल न पाऊँ
हर क्षण हर पल तेरी बातों को याद कर मुस्कुराऊँ
हर तीज-त्यौहार आए तेरे आने की बाट जोहूँ मैं
यादों की गठरी को चुपचाप स्नेह से ढोऊँ मैं
चिथड़े हुए सपनों को सीने से लगाए फिरूँ
यादों की गिरफ़्त में उन्हें स्नेह से सिलने को बेताब हूँ मैं।
दिल में टीस-सी सजी बैठी है तेरी याद
काले बादलों सी बीतती हैं तेरे बिन हर रात
जहाँ भी हो तुम खुश रहो, यही दुआ करती है लीना तेरी ख़ास।
इस जन्म न सही अगले जन्म में मिलेंगे
बनकर राखी की पावन सौगात।
लेखिका ✍️ लीना शारदा
जकार्ता इंडोनेशिया″




