साहित्य

श्रमिक

श्रीनिवास एन

वह निरंतर मेहनत करता है
आलसीपन को छोड़ देता है
सर्दी गर्मी को गिनती नहीं है
निस्वार्थ भाव से कार्य करता है
श्रमिक समाज में संघ जीवी है।

अपने भुजबल पर यकीन रखता है
उत्साह से काम में लीन होता है
सुबह से शाम तक श्रम करता है
समय पर निगाह नहीं रखता है
श्रमिक संघ में अनमोल रत्न है।

वह अपने लक्ष्य को जानते है
परिश्रम करके पैसे कमाते है
इससे कुटुंब को पोषण करते है
नित सेवा करने में निमग्न होते है
श्रमिक जीवन सुख दुखों से भरा है।

हर दिन गलियों को साफ करता है
कूड़ा कचरा को डिब्बा में डालता है
कर्तव्य निष्ठा से कार्यरत करता है
परिश्रम करके जीवन बिताता है
श्रम पर विश्वास करनेवाले ही श्रमिक है।

श्रीनिवास एन, आंध्रप्रदेश
साहित्यकार

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!