
मेहनत और लगन से, करता अपना काम ।
तब जाकर पाता कहीं, थोड़े से वह दाम ।।
गुजर-बसर है कर रहा, करके वह श्रमदान ।
उसके ही श्रमदान से, बनते देश महान ।।
जटिल काम करता सुगम, श्रम से अपने आप ।
नहीं सताते हैं उसे, बरखा, सर्दी, ताप ।।
करता है हर काम को, कभी न होता खिन्न।
जो भी खाने को मिले, खाकर रहे प्रसन्न ।।
परम आत्मा ने दिया, इनको श्रम वरदान ।
राष्ट्र उन्नति के लिए, इनका हो सम्मान।।
*मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’*
चंदौसी
मो. 8433013409




