साहित्य

हम मजदूर हैं, मजबूर नहीं

आशा जाकड़

मेहनत करते,पसीना बहाते
पर हम स्वाभिमान से रहते
रूखा सूखा खाकर पेट भरते
कभी बेबस व दीनहीन न बनते

ऊँची- ऊँची ,अट्टालिकाएं बनाते
पर खुद नीली छत के नीचे सोते
ग्रीष्म की तपन , शीत की ठंडक
बारिश,आंधी तूफान सब सहते

श्रम करना जीवन का धर्म हमारा
श्रम करना ही मुुख्य कर्म हमारा
भाग्य भरोसे हम कभी न रहते
श्रम कर जीवन पथ पर आगे बढ़ते

हम मजदूर.हैं मजबूर नहीं
कलाकार हैं ,कोई याचक नहीं
कारीगर हैं, पर निर्धन नहीं
हम मेहनत कश हैं,कामचोर नहीं

हमारे भी कुछ अरमान हैं।
उठता हृदय में तूफान है
हमारे मेहनत की कद्र हो
बह चाहते थोड़ा सम्मान है।।
आशा जाकड़

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