
मैं मजदूर
कर्तव्य भावयुत
श्रमिक शूर
होते ही प्रात
पहुंचे कर्मस्थल
लौटे वो रात
तपता तन
बहते श्रमकण
पाने को धन
बस दो रोटी
नहीं चाह प्रबल
पगा लँगोटी
ईमान दार
श्रम है हथियार
माने न हार
नरेश चन्द्र उनियाल
“कमली कुंज”
देहरादून उत्तराखण्ड।

मैं मजदूर
कर्तव्य भावयुत
श्रमिक शूर
होते ही प्रात
पहुंचे कर्मस्थल
लौटे वो रात
तपता तन
बहते श्रमकण
पाने को धन
बस दो रोटी
नहीं चाह प्रबल
पगा लँगोटी
ईमान दार
श्रम है हथियार
माने न हार
नरेश चन्द्र उनियाल
“कमली कुंज”
देहरादून उत्तराखण्ड।