साहित्य

*करे योग, रहें निरोग*

ममता झा मेधा 

*करे योग, रहें निरोग*

 

सुबह की पहली किरण जब द्वार खटखटाए,

बिस्तर छोड़ो, आलस तोड़ो, योग का वक्त आए।

न मोबाइल, न बहाना, बस एक चटाई बिछाओ,

साँसों के संग डोर बाँधो, तन-मन को जगाओ।

 

करे योग, रहें निरोग,

यही मंत्र है सबसे खास।

रोग भागे कोसों दूर,

जब हो तन में योग का वास।

 

अनुलोम-विलोम से फेफड़े गाएं मल्हार,

कपालभाति से निकले मन का सारा विकार।

वृक्षासन में सीखो स्थिर रहना एक पाँव,

भुजंगासन में भरो रीढ़ में नया चाव।

 

ना गोली, ना कैप्सूल, ना डॉक्टर की लाइन,

सूर्य नमस्कार है सबसे बड़ी वैक्सीन।

बीपी, शुगर, मोटापा, सबका यही इलाज,

योग नहीं खर्चा माँगे, माँगे बस थोड़ा रियाज़।

 

बच्चा-बूढ़ा, नर-नारी, सबका एक ही नारा,

योग से जुड़ेगा अब हर घर-द्वारा।

मन को मिले शांति, तन को मिले शक्ति,

योग ही है जीवन की असली भक्ति।

 

तो आओ संकल्प लें, हाथ उठाकर बोलें,

हर दिन योग करेंगे, तभी स्वस्थ रहेंगे ।

स्वस्थ तन में स्वस्थ मन, स्वस्थ बनेगा देश,

करे योग, रहें निरोग ,यही भारत का संदेश।

***********************

ममता झा मेधा

डालटेनगंज

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!