साहित्य

कविता

पंडित मुल्क राज

जिनके दिल में अपनापन हो याद सदा वो करते हैं,

सुख दुख के हर रस्ते पर साथ सदा वो चलते हैं।

 

स्वार्थ भरी इस दुनिया में निश्चल प्रीत निभाते हैं,

दूर रहे चाहे जितने भी पल में पास आ जाते हैं।

 

दौलत से जो मिल न पाए सच्ची सौगात लाते हैं,

रूठ जाए अगर भाग्य भी पर वो साथ निभाते हैं।

 

वक्त बदलता रहता है पर उनका प्रेम नहीं बदले,

सच्चे दिल के इस बंधन को वो कभी नहीं भुलाते हैं।

 

मतलब की यारी को छोड़ के साथ हमेशा रहते हैं ,

रोती आंखों और लवों पर मुस्कान सदा दे जाते हैं।

 

 

खामोशी को भी जो सुन ले ऐसे रिश्ते पावन हैं,

“आकाश” वहीं दिल में सुख का सावन बरसाते हैं।

 

पंडित मुल्क राज “आकाश”

गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

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