
रोया नहीं था मैं,
मुझे रुलाया गया,
न ही था पागल मैं,
मुझे पागल बनाया गया,
सोची समझी चाल थी,
जानबूझकर यह जाल बिछाया गया, ।।
मुझे सीधा सादा समझ क़े आजमाया गया,
मरा नहीं था मैं,
मुझे जिांदा दफनाया गया,
कभी किसी को न ही आज़माया,
मैंने,
जितना प्यार दिया हमने गैरों और अपनों को,
उतना प्यार कभी पाया ही नहीं,
मेरी भी कमी महसूस हो शायद,
किसी और या अपनों को,
*भगवान ने मुझे ऐसा बनाया नहीं*
जाने मेरी किस्मत ने कैसा खेल खेला है !!!
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✍🏼पंकज एस पाण्डेय, शिकोहाबाद,
(स्वरचित )



