
मंगल को जन्मे कपिश , धार रूप कपि सार।।
पाप मुक्त करने धरा , लिये रुद्र अवतार।।
लिये रुद्र अवतार, चैत्र शुदि पूनम त्रेता।
मातु अंजनी गोद, बनी थी प्यार प्रणेता।।
मना केसरी मोद , खत्म असुरों का दंगल।
छायी खुशियाँ राज्य , यहाँ अब होगा मंगल।।
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आया मंगल दिन बड़ा , कलयुग में है सिद्ध।
दूर अमंगल है करे , मनोकामना रिद्ध।।
मनोकामना रिद्ध, मिले फल नर सुखदायी।
पूजा है आसान , प्रभावी मंगलदायी।।
ज्येष्ठ माह का पर्व , कृपा प्रभु कपि की लाया।
भजती मैं हनुमान, लाभ शुभ मंगल आया।।
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दस दिन के शिशु को कपिश , उठा खाट से भाग।
पता चला जब मातु को , लगी हृदय में आग।।
लगी हृदय में आग , कलेजा लेने दौड़ी।
डाली रोटी पास , मुझे है छत पर छोड़ी।।
बना दिसंबर खास , प्रसादी प्रभु दें उस छिन।
बेटी बचा मिसाल , जश्न मंगल का दस दिन।।
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई




