यूपी

खेती बचाओ अभियान के अन्तर्गत प्राकृतिक खेती कार्यशाला का किया गया आयोजन

मीरजापुर(राजगढ़)।खेती बचाओ अभियान का कार्यशाला में बृहस्पतिवार को राजीव गांधी दक्षिण परिसर अन्तर्गत प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन न्यू लेक्चर हाल, काशी हिन्दू विश्व विद्यालय, बरकछा मेें दया शंकर मिश्र ‘दयालु’, आयुष राज्य मंत्री, उ0प्र0 सरकार की अध्यक्षता में किया गया।
दया शंकर मिश्र ‘दयालु’, आयुष राज्य मंत्री, उ0प्र0 सरकार द्वारा बताया गया कि अन्धाधुन्ध एवं असंतुुलित उर्वरकों के प्रयोग से प्राप्त अनाजों के सेवन से मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है एवं साथ ही साथ मृदा की उर्वरता स्तर एवं मृदा स्वास्थ्य में निरन्तर गिरावट हो रही है। जिसको बचाने हेतु कृषक भाई प्राकृतिक खेेती एक अच्छा विकल्प होगा। इस विधा में मृदा स्वास्थ्य बढ़ोत्तरी के साथ पर्यावरण की गुणवत्ता भी लम्बे समय तक संरक्षित रहती है। प्राकृतिक खेती की शुरूआत करने हेतु देशी नस्ल के गाय एवं देेशी बीज की आवश्यकता होती है।
सोहन लाल श्रीमाली, उपाध्यक्ष, राज्य, पिछड़ा वर्ग, आयोग उ0प्र0 सरकार द्वारा कृषकों को सम्बोधित करते हुए कहा गया कि किसान भाई अपनी अगली संतति को यदि रोग मुक्त करना चाहते है तो आज समय की मांग है कि फिर से गौ आधारित खेती की तरफ लौटे। किसान भाई खेती के साथ में कम से कम एक गौ का पालन करें, गौ से प्राप्त दुग्ध को बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते है।
पं0 रत्नाकर मिश्र,  विधायक नगर द्वारा कार्यक्रम में कृषकों को सम्बोधित करतेे हुए बताया गया कि भारत वर्ष एक कृषि प्रधान देश है। भारत वर्ष में वैदिक काल से ही खेती में देशी गाय के गोबर का बड़ा ही महत्व रहा है। हरित क्रान्ति के बाद अन्धाधुन्ध उत्पादन प्राप्त करने हेतु मिट्टी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अब वक्त आ गया है कि मिट्टी, पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य को उत्तम टिकाऊ बनाने के लिए प्राकृतिक खेती एक अच्छा विकल्प है। इसमें देशी गाय के गोबर, गोमूत्र इत्यादि का प्रयोग करके खेती की जाती है। जिससे मिट्टी के अन्दर लाभदायक जीवाणु की वृद्धि होती है।
श्री अनुराग सिंह विधायक चुनार द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित कृषकों को बताया गया कि कृषक भाई अब समय की मांग है प्राकृतिक खेती के साथ श्रीअन्न फसलों का उत्पादन किया जाए जिससे सुपर अलनीनो के प्रभाव के कारण सम्भावित सूखा के भी स्थिति में अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
श्याम सुन्दर केशरी, नगर पालिका अध्यक्ष, मीरजापुर द्वारा उपस्थित कृषकों को बताया गया कि कृषक भाई प्राकृतिक खेती अपनाकर अपने जीवन को स्वास्थ्य पूर्ण कर सकते है। साथ ही इससे प्राप्त उत्पाद को अच्छे दाम पर बेचकर अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते है। अब खेती, खेती को उद्योग के तरह करके अपनी आय को दोगुना वृद्धि कर सकते है।
रिंकी कोल  विधायक छानबे द्वारा कृषकों को सम्बोधित करते हुए कहा गया कि किसान भाई प्राकृतिक खेती अपनाकर अपने जीवन में सुधार लाए एवं उनके उत्पाद से अच्छी आमदनी प्राप्त कर अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते है।
सुचिस्मिता मौर्या,  विधायक मझवां द्वारा बताया गया कि खेती के साथ बागवानी, पशुपालन एवं सब्जी उत्पादन करके कृषक भाई अपनी आय में वृद्धि कर सकते है।
लोक भारती प्रयागराज से आये उदित नरायण शुक्ला द्वारा कृषकों को बताया गया कि प्राकृतिक खेती, जैविक खेती से निकला हुआ एक विद्या है जिसमें केवल एक देशी गाय से एक एकड़ खेती प्राकृतिक रूप से किया जा सकता है। इस खेती पद्धति में शुक्ला ने बीजामृत, जीवामृत आच्छादन एवं वापसा पर विस्तृत चर्चा कृषकों के बीच किया एवं उसके प्रयोग के बारे में विस्तार से बताया गया।
कृषि विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष डा0 श्रीराम सिंह द्वारा बताया गया कि प्राकृतिक खेती में देशी गाय एवं देशी बीज का समावेश आवश्यक है। देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र से बीजामृत, जीवामृत एवं घनजीवामृत पर चर्चा के साथ ही साथ गाजर के घास पर नियंत्रण हेतु विस्तार से बताया गया।
उप कृषि निदेशक श्री विकेश कुमार द्वारा उपस्थित कृषकों को कृषि विभाग द्वारा चलायी जा रही योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।
प्राकृतिक खेती कार्यशाला में कृषि विभाग, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, फसल बीमा, रेशम, एनआरएलएम एवं अन्य विभागों द्वारा स्टाल लगाया गया। कार्यशाला में लगभग 800 कृषकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार भी उपस्थित रहें।
कार्यक्रम की समाप्ति डा0 अवधेश कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी, मीरजापुर द्वारा उपस्थित अतिथि व कृषकों को धन्यवाद देकर किया गया।

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