साहित्य

छंदमुक्त कविता (संवाद शैली)

डॉ ऋतु अग्रवाल

त्नी:- “चलो खरीद लायें एक एसी,

उमस भरी यह जून की गर्मी,

सहा नहीं जाता है यह ताप,

यह स्वेद और चुभन, जलन।”

 

पुत्र:- “मेरे मित्रों के घर में तो लगे हुए हैं एसी कई,

पापा! आप जानते हो घर में एसी होना भी,

उच्च स्तर का है परिचायक।”

“नहीं बुलाता मैं घर पर उनको,

क्योंकि एसी नहीं है एक भी,

समझ हमें वह निर्धन,

उपहास उड़ाएँगे हमारा।”

 

पुत्री:- “भाई सही कहता है पापा,

बड़ी दुकानों, प्रतिष्ठानों, कार्यालयों ,बंगलो, घरों,

सब में ही है एसी की धाक,

मेरी सखी सहेलियाँ बिठाती हैं बड़ी शान से,

अपनी एसी वाली बैठक में,

बड़ी अदा से उठा रिमोट,

तापमान करती निर्धारित,

और देखती हैं हेय दृष्टि से मेरी ओर।”

 

पति:- “सही कह रहे हो तुम सब,

इलाज करेगा इस सड़ी गर्मी का,

यह एसी ही अब,

रहना तुम सब तैयार,

आज तो लाना ही है यह गर्मी रोधी विद्युत यंत्र।”

 

माँ:- हाँ! हाँ! ले आओ तुम,

मौत भविष्य की, पृथ्वी की, नई पीढ़ी की,

जब तुम खाओगे,पहनोगे,पियोगे सिर्फ मशीन,

रह जाएँगे केवल कंक्रीट के जंगल,

न होगी सब्जी, अनाज, फल, तरकारी, हवा, पानी,

और एक दिन इन ठंड बरपाती मशीनों के पिछवाड़े,

उगलती आग में हो जाओगे स्वाहा!

और याद करोगे प्रकृति का प्रतिशोध,

कि तुमने नष्ट किया पेड़ों को,

और अब वे भी न देंगे तुम्हारा साथ,

चिता पर भी..….”

 

स्वरचित ✍️

डॉ ऋतु अग्रवाल

मेरठ, उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!