साहित्य

वे कद्दावर नेता हैं

जयचन्द प्रजापति

नेता हैं। उनकी अपनी जमीनी हकीकत है। जहाँ जाते दुनिया उनको सलाम करती। उनका अपनापन जनता में है। साफ-सुथरे मन के व्यक्ति हैं। विनम्र स्वभाव के हैं। लूटपाट में कोई भरोसा नहीं करते। कभी गरीबों को नहीं सताते हैं।

 

इनका अपना तेवर होने के कारण कद्दावर नेता बने हैं। बड़े पूज्यनीय हैं। विशाल ह्रदय के स्वामी हैं। जब आम जनता के बीच में होते हैं। ऐसा कद्दावर नेता जिसको मिल जाये वह पूंजीपति हो जाता है। वह अपना वरद हस्त जिस पर रख दे वह मालामाल हो जाता है।

 

कद्दावर नेता का हाथ सरकारी माना जाता है। सरकार में उनकी गिनती होती है। सरकार भी इनकी बात मानती है। छोटे बड़े सुझाव को सरकार गले लगा लेती है। इस तरह इनकी अपनी धाक होती है। कद्दावर नेताजी कलयुग के देवता हैं। जहाँ जाते हैं। फूल माला की वर्षा की जाती है। ‘तुम भी फूलो फलो, हम भी फूले फले ‘ यह कहावत कद्दावर नेता तथा उनके चमचों पर सटीक निशाना है।

 

जब भरोसेमंद जनता अंधेरी रात में सुख की निद्रा में होती है तो ये कद्दावर नेता फाइलों में लग जाते हैं। सरकारी पैसों को हजम करने की नीति बनाते हैं। किस योजना में किसको कितना देना है ? मामला हल कर लिया जाता है। अधिकारियों को रात के अंधेरे में चढ़ावा चढ़ाया जाता है। मामला रात का रात में रफा-दफा कर दिया जाता है।

 

आम जनता खर्राटे में मस्त है। कद्दावर नेता हेराफेरी में मस्त हैं। सुबह होते ही जनता जागने लगती है। आम जनता को उठते देखकर कद्दावर नेता भी आंख मलकर उठते नजर आते हैं। आम जनता को समझ में आता है कि कद्दावर नेता हम लोगो के साथ सोते हैं तथा सुबह होते ही नेताजी भी उठ रहें हैं पर कद्दावर नेता की खुद्दारी तथा गद्दारी का मर्म समझना बहुत मुश्किल है।

 

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जयचन्द प्रजापति “जय’

प्रयागराज

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