
व तुम मेरी हर मुश्किल हरना।
जहाँ रोकर लौटे थे हम कल,
वहीं आज हँसने का बल देना।
ज़ख़्मों को अब गुलज़ार बनाना है,
आँसू को भी मुस्कान बनाना है।
इस मतवाले चंचल मन को आज,
तेरी भक्ति का आधार बनाना है।
राहों के सब पत्थर हट जाएँगे,
ग़म के काले बादल छँट जाएँगे।
जब तुम थामोगे मेरा यह हाथ,
संकट के सारे पर्वत कट जाएँगे।
हिम्मत मेरी कभी पस्त न होगी,
जीवन की कश्ती ध्वस्त न होगी।
तुम जो साथ हो मेरे माधव,
उम्मीदों की सुबह अस्त न होगी।
उस वीराने में फ़ूल खिलाना है,
जहाँ दर्द का गहरा ठिकाना है।
तुम्हारी कृपा से ओ मेरे माधव,
मुझे हर हाल में मुस्कुराना है।
-डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद, गुजरात।




