साहित्य

पितृदिवस के उपलक्ष में पापा को समर्पित – “मेरे पापा”

सुमन बिष्ट😊😊

पितृदिवस के उपलक्ष में पापा को समर्पित –

“मेरे पापा”

 

क्षितिज सी विशाल

पिता की छत्रछाया

दुःख का एक भी कंकड़

हमें कभी चुभ न पाया

 

जीवन का अमूल्य

उपहार हैं हमें दिया

हौसला सब का बढ़ा

पतवार का काम किया

 

उम्मीद और आस जगा

हिम्मत से जीना सिखाया

संघर्षों से जीत कर

स्वाभिमान का पाठ पढ़ाया

 

हमारे बेहतर भविष्य की ख़ातिर

दुनिया भर की झेली आँच

विदेशी धरती पर बहा पसीना

तपिश में दी शीतल छाँव

 

अभिमान आप हो हमारा

और हो हमारी शान

आपसे ही हमने पाया हमने

नाम , ज्ञान और मान ।।

 

सुमन बिष्ट😊😊

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