साहित्य

विवाहित इस हास्य का भरपूर आनंद ले सकते हैं   21 जून योग दिवस पर विशेष 

पं पुष्पराज धीमान

नोट.  विवाहित इस हास्य का भरपूर आनंद ले सकते हैं   21 जून योग दिवस पर विशेष

हास्य का शीर्षक ..रामदेव और कामदेव

…………………………………………….

कामदेव और रामदेव में इतना सा अंतर है श्रीमान

एक शरीर को बाहर से एक अंदर से करता है

 

दोनों के नाम में एक को छोड़कर तीन अक्षरों की समानता है

बाकीअक्षरों से बने हुए शब्द की संसार में बड़ी म

 

कामदेव का कऔर रामदेव का र मतलब करना है प्राथमिकता में

अब सुनो असल बात क्या है दोनों की वास्तविकता मे

 

एक योग करने के लिए दूसरा भोग के लिए करता है प्रेरित

एक शांत चित के लिए दूसरा चित को करता है उत्तेजित

 

दोनों शरीर को इधर-उधर ऊपर नीचे कराते हैं

दोनों ही सांसे गर्म होने की स्थिति में पहुंचते हैं

 

दोनों को ही करने से शरीर को मिलत बड़ा-आराम है

थकावट और पसीना बस यही दोनों का  परिणाम है

 

ठंड पास नहीं लगती मौसम जैसे जून का महीना

अविवाहित के समझ में यह बात आएगी कभी ना

 

आंखें तो लगभग दोनों में ही हो जाती हैं बंद

और समाप्त हो जाता है प्राणायाम का छंद

 

योगासन करने से बीमारियां भी रहती है दूर भोगासन करने से आदमी हो जाता चूर चूर

 

कामदेव ने दुनिया में नींवरखी प्रेम प्यार की

रामदेव को क्या पता एबीसीडी परिवार की

 

कामदेव रहता है बुड्ढे के मन में भी मौजूद

कामदेव की वजह से ही रामदेव का वजूद

 

जनसंख्या ना होती तो किसे कराते लोम अनुलोम प्राणायाम

कहां से लाते  इतने आदमी कौन करता उनकी फैक्ट्री में काम

 

सृष्टि के सारे प्राणियों में कामदेव का ही जुनून है

इनकी वजह से ही सारे प्राणी मनाते हनीमून है

 

बेशक रामदेव अपनी जगह ठीक है

लेकिन कामदेव आनंद का प्रतीक है

 

कामदेव ने प्रत्येक प्राणी  को दे रखी है सौगात

सोच समझ कर बताओ ठीक है ना मेरी बात

 

पं पुष्पराज धीमान भुलक्कड़

गांव नसीरपुर कला हरिद्वार उत्तराखंड

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!