साहित्य

रामलला

डॉ गीता पांडेय अपराजिता

दर्शन पाकर रामलला के, अवध नगर है हर्षाया।
राम बिराजे हैं मंदिर में, भगवा झंडा लहराया।।

राम लक्ष्मण सीता मैया, बजरंगी भी आए हैं।
सत्य-धर्म को जगह मिल गयी,भक्त सभी अब धाए हैं।।
कलयुग में त्रेता को पाकर, जन-जन का मन हुलसाया।
दर्शन —-

राम नाम को नित जपनें से, मन निर्मल शुचि हो जाता।
मिट जाती है सकल तमसता,सात्विक भाव उभर आता।।
हर बाधा सत्वर मिट जाती, पुलकित होती है काया।
दर्शन—-

राम नाम के हीरे मोती,लूट सभी जन लो आकर।
धन्य सफल यह जीवन होगा, दिव्य खजाना को पाकर।।
तन-मन-धन सब कुछ अर्पण कर,तज मानव जग की माया।
दर्शन———-

महिमा रघुनंदन की गाओ, हृदय कलुषता को धोलो।
शुभ दिन शुचि संकल्प करो सब,जय श्री राम सदा बोलो।।
वर्षों से जो आस लगाई, देखो वह पल है आया।
दर्शन —

कथनी करनी को सम रखकर,मर्यादित जीवन जी लो।
मन आह्लादित सदा रहेगा, राम नाम मधुरस पी लो।।
विजय आज हम सब ने पाई, सरयू तट भी मुस्काया।
दर्शन—-

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
रायबरेली उत्तर प्रदेश
941571 8838

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