साहित्य

रचना शीर्षक

कपूर"श्री हंस

।सब कुछ छोड़ कर जाताआदमी इस जमीन पर।

।। विधा।।गीत ।।

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सब कुछ छोड़ कर जाता आदमी इस जमीन पर।

सब कुछ जाएगा साथ मेरे क्या बस इस यकीन पर।।

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धन दौलत सब रह जाता यहीं कि सांस थम जाती है।

छोड़कर चल देताआदमी लोगोंआँख हो नम जाती है।।

देखो उनको जरा लुटा जाते सबकुछ इस सरजमीन पर।

सब कुछ छोड़ कर जाता आदमी इस जमीन पर।।

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जब भी जाओ किरदार की खुशबू सब को आती रहे।

करके जाओ कुछ ऐसा कि तेरी याद सबको भाती रहे।।

कोशिश रहे तुम्हारी जिंदगी भर करने को कुछ नवीन पर।

सब कुछ छोड़ कर जाता आदमी इस जमीन पर।।

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इस जिंदगी को समझो कि ये तुम्हारा एक इम्तिहान है।

अच्छे कामों के लिए तो प्रभु हमेशा रहता मेहरबान है।।

मतआंकों खुद को कम कि सबकुछ है तेरे आधीन पर।

सब कुछ छोड़ कर जाता आदमी इस जमीन पर।।

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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”

बरेली।।

©. @. skkapoor

सर्वाधिकार सुरक्षित

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