साहित्य

अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस के अवसर पर 

संजय प्रधान 

जब तक व्यसन है तब तक सुरूर है,

वरना ये जीवन तो एक कड़ी जंग है।

 

व्यसन के लिए भी आदमी संघर्ष करता है,

दिन भर हर जगह परेशान भटकता रहता है।

 

बढ़ती है उम्र आदमी कमजोर हो जाता है,

ख़तरनाक बिमारी हारी से घिर जाता है।

 

इलाज के लिए रोज अस्पतालों के चक्कर लगाता है,

जोड़ी गई सम्पत्ति का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है।

 

जाने वाला तो संसार से चला जाता है,

परिवार के हाथ कुछ नहीं लग पाता है।

 

जन्म मिला है इंसान का नशे से तौबा करो,

योगा प्राणायाम संग अच्छे काम करो।

 

सुख की कामना करो सुख मिलेगा,

तुम्हारे नशे की आदत से परिवार को कष्ट मिलेगा ।

 

सुख सम्पत्ति के लिए सुरूर का त्याग करो,

सुखी परिवार के लिए नशे का त्याग करो।

संजय प्रधान

देहरादून।।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!