साहित्य

ट्रांसफार्मर फेल होने पर केसे बिताई रात

श्रीमती विनोद

बिजली ना आई

सारी——-रात।

माई री ! मैं सोऊं कैसे?

इन्वर्टर —– ने ,

किये खड़े हाथ।

माई री! मैं सोऊं कैसे?

 

खिड़की–खोलूं ,

छत पर जाऊं।

बाहर — भीतर ,

चैन ना पाऊं ।

पंखा झल-झल ,

थक-थक जाऊं ।

जेठ महीने की यह रात ।।

माई री ! ———

 

भिनभिन, भिनभिन

मच्छर—— खावैं।

कपड़ा तन—- से ,

छुआ ना—–जावै।

मोटे———- गद्दे ,

तपन——-बढ़ावैं ।

गर्मी , नचावै पूरे नाच।।

माई री!———–

 

भर- भर पसीना,

गात——भिगोवै।

गर्मी के—– मारे,

जिया—–हौलावै।

पानी, ——-पी-पी,

पेट——-अटावै।

पेड़ का हिले ना कोई पात।।

माई री! ———–

 

श्रीमती विनोद शर्मा

रानीबाग, धामपुर

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