
डॉ. सत्य नारायण आर्य (स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी, विशिष्ट हिन्दी सेवी,तथा समाजसेवी) पुस्तकालय के तत्वावधान में आज प्रात: डॉक्टर सत्य नारायण आर्य जन्मोत्सव यज्ञ-हवन करके मनाया गया l पुस्तकालय के संस्थापक एवं प्रसिद्ध कवि ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति ने इस अवसर पर डॉ. सत्य नारायण आर्य के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह अगस्त क्रांति 09 अगस्त 1942 अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में जेल गये थे l हिन्दी आंदोलन में आर्य समाज के आह्वान पर 1956 में अंबाला जेल में बंद हुए थे l आज़ादी के बाद आर्य समाज और डी ए वी इन्टर कालेज के सक्रिय सदस्य के रूप में निःशुल्क सेवा देते रहे l वह स्थानीय आर्य समाज के दो बार प्रधान भी रह चुके थे l इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार और कवि बाबू गिरिराज सिंह की अध्यक्षता में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया l राजेश मृदुल मृदुल ने माँ शारदे की वन्दना करने के बाद पढ़ा…
उजालों के बंगलों में देखा है अक्सर,
अँधेरे बसर कर रहे हैं जनाब l
शायर हलीम ने सुनाया…
ज़िंदगी हर किसी की फानी है,
मौत बरहक है मौत आनी है ll
संचालक ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति ने गुनगुनाया…आज़ादी के शौर्य थे, सत नारायण आर्य l
ईश्वर नित करते रहे, जग हित सेवा कार्य ll
श्याम कार्तिकेय ने पढ़ा…
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे सत्य नारायण आर्य l
देश हित में थे किए वह तो सारे कार्य ll
ब्रह्म नाथ पांडेय मधुर ने सुनाया..
बचपन वाला खेल खिलौना अमराई बगिया l
छूट गेल पगडंडी बागन कई खट्टी अमिया ll
राजेन्द्र हंस ने पढ़ा…
आओ मिलकर गुण गाएँ हम भारत वर्ष महान के l
हिन्दुस्तान में रहने वालों हो जा हिन्दुस्तान के ll
सूरज कुँवर सरस ने गाया…
कचबचिया कै बदरा बुड़ान भइलें l
अंत में अध्यक्ष बाबू गिरिराज सिंह (लोकतंत्र रक्षक सेनानी) ने सुनाया…
अकाल मृत्यु के भेंट चढ़ रहे, देश के भावी कर्णधार l
जिसका कारण बना हुआ, सिस्टम में बैठा भ्रस्टाचार ll
अंत में लखनऊ में अग्नि कांड में मृत विद्यार्थियों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर प्रभु से प्रार्थना की गई l कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये संयोजक ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति ने सभी के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया l ओम शांति के साथ कार्यक्रम को स्थगित किया गया l



