साहित्य

जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई 

 डॉ. शिवनाथ सिंह

“जन्मदिन पर यमराज के मित्र को प्रणाम”*

*संस्थापक, काव्य रस साहित्य मंच, रायबरेली*

* डॉ. शिवनाथ सिंह “शिव”*

 

*”जन्मदिन उन्हीं का मनाया जाता है, जिनके होने से जीवन उत्सव बन जाए।”*

 

आज जब *सुप्रसिद्ध हास्य-व्यंग्यकार, ‘यमराज के मित्र’ सुधीर श्रीवास्तव जी* का जन्मदिवस है, तो स्मृतियों की वीणा स्वयं झंकृत हो उठी है।

 

*पहली भेंट : रायबरेली की धरती पर*

काव्य रस साहित्य मंच, रायबरेली के मंच से हमारा नाता जुड़ा। मंच पर जब एक सौम्य, श्वेत केश, आँखों में बाल-सुलभ चमक लिये व्यक्ति ने माइक सँभाला और कहा – *”मित्रों, आज यमराज से मिलकर आ रहा हूँ”* – तो श्रोता चौंके। पर अगले ही पल जब उन्होंने यमराज को अपना ‘जिगरी दोस्त’ बनाकर समाज की विसंगतियों पर चोट की, तो पूरा प्रांगण ठहाकों और तालियों से गूँज उठा।

 

उस दिन समझ गया – *यह व्यक्ति मृत्यु के देवता से भी मुस्कान छीन लाने का माद्दा रखता है।* औपचारिक परिचय कब आत्मीय ‘शिव दादा’ में बदल गया, पता ही न चला।

 

*गोरखपुर-देवरिया यात्रा : जहाँ अतिथि ‘देव’ हो गया*

कुछ माह बाद साहित्यिक यात्रा में उनके घर रुकना हुआ। मैं, कविराज शिवकुमार सिंह ‘शिव’ जी और इन्द्रेश भदौरिया दादा तथा सचिन श्रीवास्तव सारथी, जो हमारी कार चलाकर रायबरेली से अयोध्या, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, पडरौना और फाजिलनगर तक लम्बी यात्रा पर निकले और खराब स्वास्थ्य के बावजूद हम लोगों के साथ पूरे मनोयोग से उस ऐतिहासिक पूर्वांचल उप्र के दौरे मे साथ रहे । द्वार पर पूरे कुटुम्ब ने इस तरह वरण किया मानो हम बेटी के ब्याह में आए बाराती हों।

 

रात भोजन के बाद बैठक में जब सुधीर जी ने कहा – *”शिव दादा, यमराज कह रहे थे कि धरती पर व्यंग्यकारों से डर लगता है, क्योंकि ये मरने के बाद भी आदमी को ज़िंदा कर देते हैं”* – तो हम लोट-पोट हो गए।

 

पर उसी रात उन्होंने गम्भीर होकर कहा था – *”दादा, कलम की स्याही में अगर आँसू और अट्टहास दोनों न हों, तो वह कलम बाँझ है।”* यह वाक्य मेरी साहित्य-दृष्टि का मंत्र बन गया l

 

एक बात और उन्होंने जो कही थी कि साहित्यकार/रचनाकार को सतत साहित्य सृजन करते रहना चाहिए उसके कलम की स्याही कभी सूखनी नहीं चाहिए क्योंकि इसी से उसकी पहचान है आज आप, इन्द्रेश दादा, शिवकुमार जी और काव्य परिवार के अधिकांश लोग इस लिए जाने जाते है क्योंकि सभी ने साहित्य को जिया है, प्रचार, प्रसार, संवर्धन देश विदेश की सीमाओं से आगे बढ़कर किया है और यहीं वास्तव मे साहित्य धर्मिता है हम भले रुक जाये, झुक जाये, थक जाये लेकिन साहित्य नहीं रुकना, झुकना और थकना चाहिए. आज भी हमारे पटल चाहे केंद्रीय या प्रादेशिक हो व्यक्तित्व के बदौलत नहीं बल्कि कृतित्व और साहित्य सृजन के बदौलत आगे बढ़ रहे है और उसी मंत्र को सिद्द्त के साथ आगे बढ़ाना होगा.

 

*रचनाकार सुधीर : यमराज को मित्र बनाने का साहस*

‘यमराज’ – मृत्यु, भय, दंड का प्रतीक। उससे मित्रता? यह केवल वही कर सकता है जिसके मन में न पाप हो, न द्वेष। सुधीर जी ने ‘यमराज मित्र’ उपनाम से जो विधा रची, वह हिंदी व्यंग्य में अनूठी है। वे हँसाते-हँसाते रुला देते हैं, और रुलाते-रुलाते सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

 

उनके व्यंग्य में *तुलसी की मर्यादा, कबीर की फक्कड़ता और बेढब बनारसी का ठसका* – तीनों एक साथ मिलते हैं।

 

*व्यक्ति सुधीर : मनुष्य पहले, साहित्यकार बाद में*

आज जब मंचों पर ‘मैं-मैं’ का शोर है, सुधीर जी कान में धीरे से कहते हैं – *”दादा, अपना नाम तो यमराज की बही में भी नहीं लिखा, फिर यहाँ क्या लड़ना।”* इतनी सरलता, इतनी विनम्रता दुर्लभ है।

 

उनका घर आज भी बिना द्वार-खटखटाए खुल जाता है। उनकी बैठक आज भी चाय से ज़्यादा अपनापन परोसती है।

 

*जन्मदिन पर कामना*

*’यमराज मित्र’ जी,* आप दीर्घायु हों – इसलिए नहीं कि आप हमें चाहिए, बल्कि इसलिए कि *हिंदी व्यंग्य को आपका ‘यमराज’ चाहिए*। समाज को आपकी ठिठोली चाहिए, ताकि वह अपनी विद्रूपता पर हँस सके और सुधर सके।

 

काव्य रस साहित्य मंच, रायबरेली परिवार की ओर से, इस जन्मदिवस पर आपको सादर प्रणाम। ईश्वर करे, आपकी कलम से ‘यमराज’ सौ वर्ष तक हमसे बतियाता रहे।

 

*_”जन्म-दिवस की मंगल बधाई,

यमराज मित्र को शिव की दुहाई।

कलम चलती रहे,

ठहाका खिले,

सत्य-शिव-सुंदर का दीपक जले।”_*

 

आदरणीय सुधीर दादा जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई

 

*आपका अपना ,*

डॉ. शिवनाथ सिंह “शिव”*

संस्थापक, काव्य रस साहित्य मंच, रायबरेली

दिनांक: 01, जुलाई 2026

 

 

*जन्मदिवस की अनंत शुभकामनाएँ सुधीर जी को। जय सियाराम।*

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!